आज जन्माष्टमी है! जन्माष्टमी यानी श्रीकृष्ण का जन्म। कौन हैं श्रीकृष्ण, जिनका जन्म हुआ? हर एक में श्रीकृष्ण हैं। तुममें भी श्रीकृष्ण हैं, मुझमें भी श्रीकृष्ण हैं। तुम उनको श्रीकृष्ण, श्रीराम, गुरु नानक देव, गौतम बुद्ध, महावीर, जीसस, मोहम्मद, मीरा बाई, सहजो बाई, लल्ला बाई कुछ भी कहो। नाम कोई भी लीजिए, ईश्वर तो एक ही है। ये सब जो नाम हैं, इन सबकी जन्माष्टमी हुई। श्रीराम जी और श्रीकृष्ण जी अवतरित होकर ही धरती पर भगवान के रूप में आए थे। क्योंकि त्रेतायुग में श्रीराम जी आए, द्वापर युग में श्रीकृष्ण जी आए और अब कलयुग है। आगे जो युग आएगा, उसके अंदर गौतम बुद्ध, महावीर, जीसस, गुरु नानक देव, रामकृष्ण परमहंस, मीरा बाई, सहजो बाई, लल्ला बाई, मोहम्मद इन सबको भी अवतार कहा जाएगा, यह समझना !
कभी कोई सीधा अवतार के रूप में जन्म नहीं लेता। परमात्मा को क्या पड़ी है जो महल छोड़कर इन गंदी गलियों के अंदर आएँगे? वो कभी भी ऐसे नहीं आते, इसलिए कभी कोई अवतार होता ही नहीं, पर ये सब हमारी ही अपनी एक कल्पना है। जब किसी देह से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार बाहर आ जाता है तो वो अवतरित होते हैं, उसी को कहते हैं अवतार। भगवान अवतरित हुए, जन्म से कभी भी भगवान पैदा नहीं होते;
इसलिए कहते हैं कि जब भगवान किसी के अंदर उतरें, उससे ब्रह्म ज्ञान लो, वही तुम्हें ब्रह्म से मिलाएगा। जिसके अंदर ब्रह्म उतरा, वो काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार से विरक्त हो जाता है; श्रीकृष्ण जी के शरीर में भगवान ने जन्म लिया।
भगवान कोई शरीर नहीं है, भगवान एक सरनेम है। जन्म तुम्हारा भगवान से हुआ है पर तुम शैतान हो गए हो और तुम्हें फिर से भगवान हो जाना है। भगवान कौन? भगवान वो जिसने काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, कंचन, कीर्ति और कामिनी को अपने अंदर नहीं आने दिया। हर एक देह के अंदर अवतरण होने के लिए भगवान राजी हैं, परन्तु देह के अंदर जब तक विकार हैं, तब तक उस देह के अंदर ब्रह्म नहीं आएगा। हर देह में श्रीकृष्ण आने को तैयार हैं, उनके अंदर आने पर हर देह की जन्माष्टमी होगी। श्रीकृष्ण जी की मूर्ति इशारा है, जन्माष्टमी इशारा कर रही है कि अपने अंदर श्रीकृष्ण को लाओ। अगर अंदर श्रीकृष्ण नहीं आए और अंदर कंस ही बैठा रहा, तो बाहर श्रीकृष्ण जी की पूजा व्यर्थ हो गई। तुम्हारे अंदर काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार है, इसलिए तुम्हारे भगवान बाहर ही हैं। तुम बाहर के श्रीकृष्ण को ही पूजोगे, क्योंकि बाहर पूजता वही है जिसके अंदर भगवान प्रकट नहीं होते। अंदर श्रीकृष्ण को लाने के लिए तैयारी करो, तब है जन्माष्टमी। अगर तुम अपने अंदर श्रीकृष्ण को अवतरित नहीं करोगे तो तुम्हारी जन्माष्टमी सिर्फ बच्चों का खिलौना बनकर रह जाएगी। तुम्हारे अंदर जो ये शैतान फँस गया है, इसको बाहर करो और जब ये शैतान बाहर आएगा तो तुम्हारे अंदर भगवान अवतरित होंगे। फिर तुम्हारे नाम के साथ भगवान का नाम होगा। अगर तुम्हारी ये समझ में आ जाए तो तुम्हारी जन्माष्टमी बढ़िया है।
सत्य के अंदर जब ज्ञान मिलता है तो जीवन एक अलग दिशा में चलता है, इसलिए श्रीकृष्ण भगवान ने ज्ञान योग को सर्वश्रेष्ठ कहा। हर उत्सव, चाहे जन्माष्टमी हो या कुछ भी, उसका मुख्य संदेश जीवन में उतारो। बाहर से भले ही फिर नारियल, बर्फी खाओ, परन्तु अंदर वाले उस श्रीकृष्ण को मत भूलो। अंदर श्रीकृष्ण जी तभी आएंगे जब तुम्हारे विकार बाहर होंगे। अगर अंदर विकार हैं, तो तुम्हारे अंदर कोई भी भगवान नहीं आएँगे। भगवान उन्हीं के अंदर उतरते हैं जिनके अंदर विकार शून्य हो जाते हैं। जब ये स्थिति बन जाती है तो तुम्हारे अंदर ब्रह्म उतरेगा, इसी को श्रीकृष्ण जी ने स्थिति प्रज्ञा कहा है।
श्रीकृष्ण का संदेश जो सारभूत है कि – जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा अच्छा ही होगा, यह यदि जीवन में उतर गया तो जन्माष्टमी सफल है,और नहीं तो फिर सिर्फ मौज लो। पर अगर श्रीकृष्ण अंदर नहीं आए तो जीवन फेल है। श्रीकृष्ण को अंदर लाना है, और वो अंदर तभी आएँगे जब विकार बाहर जाएँगे। तब अंदर परमात्मा अवतार लेगा और तभी ये तुम्हारा जन्म सफल होगा ।
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भीतर के कृष्ण को जगाना ही है सच्ची जन्माष्टमीवास्तविक जन्माष्टमी: भगवान को प्रकट करने का एक आध्यात्मिक अवसर

