गणेश चतुर्थी पर ननिहाल में विराजे गजानंद, कुंभ-2027 की थीम से सजा पंडाल बना आकर्षण का केंद्र

हरिद्वार। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में भगवान गणेश की विधि-विधान के साथ स्थापना की गई। भगवान शिव की ससुराल और भगवान गणेश का ननिहाल माने जाने वाले हरिद्वार में गणपति उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। शहर में जगह-जगह गणपति प्रतिमाएं स्थापित की गईं। इसी क्रम में प्रसिद्ध गीता भवन में श्री महामाया गणपति संगठन की ओर से विशेष आयोजन किया गया।

इस बार गणपति महोत्सव के लिए पंडाल को कुंभ-2027 की थीम पर सजाया गया है। पंडाल में समुद्र मंथन की भव्य झांकी तैयार की गई है, जिसमें भगवान गणेश के साथ कुंभ और सनातन परंपरा से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया गया है। गणपति पंडाल में समुद्र मंथन का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

गणपति पंडाल में दिखी कुंभ की झलक

श्री महामाया गणपति संगठन की ओर से हर वर्ष गणपति महोत्सव के दौरान अलग-अलग थीम पर पंडाल तैयार किया जाता है। इस बार संगठन ने आगामी कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए पंडाल को कुंभ की थीम देने का निर्णय लिया। पंडाल की सजावट में कुंभ की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा के साथ समुद्र मंथन को प्रमुखता दी गई है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर साधु-संतों और कुंभ मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। स्थापना के दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से सुख-समृद्धि तथा कुंभ-2027 के सफल आयोजन की कामना की।

महामंडलेश्वर बोले- कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने में सभी की सहभागिता

इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2027 में होने वाले कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने का संकल्प लिया है। इस दिशा में साधु-संतों के साथ ही हरिद्वार के नागरिक भी अपनी सहभागिता निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुंभ केवल हरिद्वार का आयोजन नहीं बल्कि देश-दुनिया की आस्था से जुड़ा महापर्व है। ऐसे में सभी लोगों को मिलकर इसकी तैयारियों में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गणपति पंडाल को कुंभ की थीम पर सजाकर श्री महामाया गणपति संगठन ने कुंभ-2027 की तैयारियों के प्रति अपनी सहभागिता का संदेश दिया है।

मेला प्रशासन भी तैयारियों में जुटा

मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ-2027 की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है। साधु-संतों से लेकर हरिद्वार के नागरिकों तक सभी का सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन की ओर से कुंभ से जुड़े कार्यों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कुंभ के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

मेला अधिकारी ने गणेश चतुर्थी पर लगाए गए गणपति पंडाल की सराहना करते हुए कहा कि कुंभ की थीम पर तैयार यह पंडाल अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। समुद्र मंथन का दृश्य पहली बार इस तरह धर्मनगरी में देखने को मिल रहा है। पंडाल की सजावट भी बेहद आकर्षक ढंग से की गई है।

हर साल अलग थीम पर होता है गणपति महोत्सव

श्री महामाया गणपति संगठन से जुड़े पंडित देवेंद्र कश्यप ने बताया कि संगठन की ओर से हर वर्ष गणपति महोत्सव को अलग-अलग थीम के साथ मनाया जाता है। पिछले वर्षों में भी विभिन्न विषयों पर आधारित पंडालों को श्रद्धालुओं और हरिद्वारवासियों की सराहना मिली है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए कुंभ की थीम पर पंडाल सजाने का निर्णय लिया गया। समुद्र मंथन की झांकी के माध्यम से कुंभ की पौराणिक पृष्ठभूमि और भगवान गणेश की आराधना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार में होने वाले कुंभ-2027 को लेकर मेला प्रशासन, साधु-संत और स्थानीय लोग तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे समय में गणपति उत्सव के माध्यम से कुंभ की थीम को सामने रखना संगठन की ओर से कुंभ की तैयारियों में सहभागिता का एक प्रयास है।

25 सितंबर को गंगा में होगा विसर्जन

गणपति महोत्सव के दौरान कई दिनों तक पंडाल में धार्मिक कार्यक्रम और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा का 25 सितंबर को मां गंगा में पूरे हर्षोल्लास और धार्मिक विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाएगा।

गणपति स्थापना के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा कर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। साथ ही आगामी कुंभ-2027 के सफल, दिव्य, भव्य और सुरक्षित आयोजन के लिए भी प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम के दौरान उज्ज्वल पंडित, पंडित अधीर कौशिक, मोनिका माता, अरुण पाठक, गगन बंसल सहित बड़ी संख्या में गणपति संगठन से जुड़े पदाधिकारी, श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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