जय जवान
जय किसान
रजि०नंबर-807
भारतीय किसान यूनियन
संयुक्त किसान मोर्चा
कमांक-
दिनाकः-
राष्ट्रीय सलाहकार- एडवोकेट, श्री अशोक शर्मा (बी.के.यू.)
कार्यालय का पता-पुरानी कचहरी, बस स्टेण्ड के पास, देवपुरा हरिद्वार, उत्तराखण्ड-249401, मोबाईल नंबर-9219100077
नगर मजिस्ट्रेट हरिद्वार के माध्यम से माननीय महामहिम राष्ट्रपति राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली को ज्ञापनः-
हम. देश के किसान, NDA के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा भारत अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने तथा यूरोपीय संघ यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर अपनी गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हैं। इन मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत औद्योगिक उत्पादों से भारतीय बाजारों को पाट देने की अनुमति दी जा रही है। इससे भारत के करोड़ों छोटे और मध्यम किसानों के परिवारों तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
गोपनीयता में और कॉरपोरेट दबाव के तहत किए गए ये मुक्त व्यापार समझौते भारत के राष्ट्रीय हित के साथ गहरा विश्वासघात हैं। ये भारत की कृषि पर निर्भर बहुसंख्यक आबादी की आजीविका को वैश्विक कॉरपोरेट मुनाफे और औद्योगिक विनाश की वेदी पर बलिदान करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस प्रकार ये आर्थिक उपनिवेशीकरण का खाका हैं।हम, देश के किसान, NDA के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा भारत. अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने तथा यूरोपीय संघए यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर अपनी गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हैं। इन मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए अत्यधिक सब्सिडी प्राप्त कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत औद्योगिक उत्पादों से भारतीय बाजारों को पाट देने की अनुमति दी जा रही है। इससे भारत के करोड़ों छोटे और मध्यम किसानों के परिवारों तथा सूक्ष्मए लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।
गोपनीयता में और कॉरपोरेट दबाव के तहत किए गए ये मुक्त व्यापार समझौते भारत के राष्ट्रीय हित के साथ गहरा विश्वासघात हैं।
ये भारत की कृषि पर निर्भर बहुसंख्यक आबादी की आजीविका को वैश्विक कॉरपोरेट मुनाफे और औद्योगिक विनाश की वेदी पर बलिदान करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस प्रकारए ये आर्थिक उपनिवेशीकरण का खाका हैं।
अमेरिका में केवल 1.88 मिलियन (18 लाख 80 हजार) किसान हैं, जबकि भारत में 14.65 करोड़ परिचालन जोत हैं। अमेरिका में लगभग 2% कार्यबल कृषि पर निर्भर है, जबकि भारत में 48% कार्यबल और 65% आबादी कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है। अमेरिका में औसत खेत का आकार 469 एकड़ है, जबकि 2000 एकड़ से अधिक आकार वाले खेत कुल कृषि भूमि के 61% हिस्से को नियंत्रित करते हैं। भारत में औसत जोत का आकार लगभग 2.67 एकड़ है और 86% किसान 5 एकड़ से कम भूमि के मालिक हैं। अमेरिका में प्रति व्यक्ति सब्सिडी लगभग ₹21,56,000 है, जबकि भारत में प्रति व्यक्ति सब्सिडी मात्र ₹34,000 है। कृषि के लिए इन मुक्त व्यापार समझौतों का अर्थ है कि सब्सिडी प्राप्त डेयरी उत्पादोंप्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, शराब और स्पिरिट्स के लिए बाजार के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए जाएंगे। यूरोपीय संघ की साझा कृषि नीति (CAP) और अमेरिका की संघीय नीतियां भारी और बाजार को विकृत करने वाली सब्सिडी प्रदान करती हैंए जिसकी हमारे किसान कभी बराबरी नहीं कर सकते। यूरोपीय संघ और अमेरिका के सामानों पर शुल्क समाप्त करने से सस्ते आयात की बाढ़ आ जाएगी। इससे कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें प्रभावित होंगी, घरेलू कीमतें गिरेंगी और विभिन्न फसलों के साथ पहले देखी गई तबाही दोहराई जाएगी। यह प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि भारत के छोटे किसानों के खिलाफ आर्थिक युद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंदर मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के सामने बेशर्मी से झुक रहे हैं और अमेरिकी कृषि, औद्योगिक उत्पादों तथा सेवाओं के भारतीय बाजार में मुक्त प्रवाह के लिए शून्य आयात शुल्क की मांग मान रहे हैं। किसान और समूचा मेहनतकश वर्ग, भारत के ग्रामीण बाजार को अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव के सामने समर्पित करने के इस “ऐतिहासिक विश्वासघात के लिए मोदी सरकार को कभी माफ नहीं करेगा।
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिन्स के अनुसार इस समझौते के तहत अमेरिका भारत के विशाल बाजार में अधिक अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात करेगा, कीमतों को बढ़ाएगा और अमेरिकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ाएगा।” इससे भारत के साथ अमेरिका के 1.3 अरब डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा कर रहे हैं. वहीं भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके विपरीत भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने के लिए आत्मसमर्पण कर रहे हैं। ये मुक्त व्यापारसमझौते विशाल भारतीय बाजार पर व्यवस्थित कॉरपोरेट कब्जे का रास्ता खोलेंगे, घरेलू कृषि और उद्योग को तबाह करेंगे तथा रोजगार के अवसरों को नष्ट करेंगे। भारत सरकार ने जैतून के तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों, फलों के रस और गैर मादक बीयर, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों ब्रेड, पेस्ट्री, बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, पालतू पशुओं का भोजन), भेड़ के मांस और अन्य उत्पादों पर आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति दी है। शराब पर आयात शुल्क 150% से घटाकर 20% और 30%, स्पिरिट्स पर 150% से 40%, बीयर पर 110% से 50%, कीवी और नाशपाती पर 33% से 10% तथा सॉसेज और अन्य मांस उत्पादों पर 110% से 50% कर दिया गया है। प्रसंस्कृत खाद्य बाजार को खोलने का घरेलू कृषि उत्पादन और फसल कीमतों पर व्यापक और विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जिससे छोटे किसान और MSME क्षेत्र बर्बाद होंगे।
दूसरी ओरए भारत सरकार ने यूरोपीय संघ के दबाव के आगे झुकते हुए भारत से कृषि निर्यात-जैसे अंगूर, आम तथा अन्य फलों और सब्जियों को रोकने के लिए अपनी जटिल और महंगी स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary – SPS) बाधाओं को बनाए रखा है। वहींए अपने उत्पादों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए इस मुक्त व्यापार समझौते के जरिए भारत के अपने मानकों को कमजोर किया जा रहा है। यह दोहरा मापदंड यूरोपीय संघ, अमेरिका और न्यूजीलैंड के किसानों की रक्षा करता है, जबकि हमारे खेतों और उपभोक्ताओं को अनुचित और असुरक्षित प्रतिस्पर्धा के सामने उजागर करता है।
मुक्त व्यापार समझौते में “उच्च स्तर” की बौद्धिक संपदा सुरक्षा यूरोपीय बीज और कृषि रसायन एकाधिकारों के लिए ट्रोजन हॉर्सहै। इसका उद्देश्य बीजों और पौध किस्मों पर TRIPS-प्लस प्रावधान थोपना और बीजों को बचाने, साझा करने तथा दोबारा इस्तेमाल करने के हमारे प्राचीन अधिकारों को अपराध घोषित करना है। इसके अलावा, फार्मास्यूटिकल पेटेंट की अवधि बढ़ाकर और डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू करके यह भारत के जेनेरिक दवा उद्योग को कमजोर करने और करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को महंगा बनाने का प्रयास है। इस समझौते के जरिए BJP सरकार ने लोगों की जिंदगी और किसानों के अधिकारों से ऊपर कॉरपोरेट मुनाफे को रखा है। इसका प्रतिबिंब प्रस्तावित बीज विधेयक, 2025 में भी दिखाई देता है।
इस मुक्त व्यापार समझौते में मशीनरी और विद्युत उपकरण, विमान और अंतरिक्ष यानए ऑप्टिकल, चिकित्सा और सर्जिकल उपकरण, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, लौह और इस्पात तथा रसायनों पर आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त करना भी शामिल है। मोटर वाहनों पर शुल्क 110% से घटाकर मात्र 10% कर दिया गया है। यह पूर्ण आत्मसमर्पण है, जिससे औद्योगिक विनाश और MSME क्षेत्र की तबाही होगी तथा बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा होगी।
मोदी हमेशा भारत को “लोकतंत्र की जननी” बताते हैंए लेकिन यह हास्यास्पद है कि भारतीय संसद ने ऐसे समझौते पर चर्चा तक नहीं की है जिसका जनता और अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। हम मांग करते हैं कि आप प्रधानमंत्री को निर्देश दें कि मुक्त व्यापार समझौतों से संबंधित सभी वार्ता दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और संसद में बहस के माध्यम से सरकार को जवाबदेह बनाया जाए।
हम, पूरे भारत के किसानों ने 4 से 11 फरवरी 2026 तक गांवों में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप दोनों के पुतले जलाए और 12 फरवरी2026 को बुलाई गई आम हड़ताल का सक्रिय समर्थन किया।
देशभर में तहसील और शहरी केंद्रों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए गए, जिनमें “मुक्त व्यापार समझौतों को रोकना” एक प्रमुख मांग थी। हम 22 जुलाई को “मुक्त व्यापार समझौतों के खिलाफ किसान प्रतिज्ञा दिवस” के रूप में मना रहे हैं और देशभर में प्रत्यक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान गांवों में प्रतिज्ञा लेंगे कि 2020-21 के ऐतिहासिक किसान आंदोलन की तरह सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द किए जाने तक देशव्यापी, व्यापक और निरंतर संघर्ष की तैयारी करेंगे।
हम संघर्ष जारी रखेंगे और वैश्विक कॉरपोरेट हितों के सामने ND।
सरकार के आत्मसमर्पण का विरोध करने के लिए मजदूरों के साथ हाथ मिलाएंगे। इसलिए, राष्ट्राध्यक्ष के रूप में हम देश के अन्नदाताओं की ओर से आपसे दृढ़ मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भारतीय जनता पर इन राष्ट्रविरोधी मुक्त व्यापार समझौतों को थोपने से रोकने के लिए आप हर संभव कदम उठाएं।
भवदीय,
नाम, गांव और हस्ताक्षर
Issued by –
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Samyukt Kisan Morcha
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