राष्ट्रीय चिंतन शिविर का द्वितीय दिवस संपन्न, किसान-मजदूर अधिकारों, कृषि संकट, पेंशन, बिजली दरों एवं संगठन विस्तार पर हुआ व्यापक मंथन


दिनांक: 05 जून 2026

हरिद्वार (उत्तराखंड)। अलकनंदा घाट, गंगा तट, हरिद्वार में भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का द्वितीय दिवस आज हजारों किसान-मजदूर प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संगठन पदाधिकारियों की सहभागिता के साथ गंभीर चिंतन, मंथन और भविष्य की रणनीति निर्धारण के बीच संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने कृषि, श्रम, सामाजिक न्याय, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
शिविर की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश यादव ने कहा कि देश का किसान और मजदूर आज आर्थिक असुरक्षा, बढ़ती महंगाई, घटती आय तथा प्रशासनिक उपेक्षा से जूझ रहा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है जबकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों और मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो देश की आर्थिक व्यवस्था पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
चिंतन शिविर में वक्ताओं ने कृषि योग्य भूमि के तेजी से हो रहे अधिग्रहण, किसानों को भूमि से बेदखल किए जाने की बढ़ती घटनाओं तथा कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि गांव, किसान और कृषि व्यवस्था को कमजोर कर देश का संतुलित विकास संभव नहीं है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्येंद्र कुमार मौर्य ने कहा कि देश के किसानों की आत्मनिर्भरता को समाप्त करने की योजनाबद्ध कोशिशें वर्षों से की जा रही हैं। देशी बीजों को समाप्त कर किसानों को महंगे बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर बनाया गया है। इसके परिणामस्वरूप खेती की लागत बढ़ी है, भूमि की उर्वरा शक्ति घटी है और पर्यावरण तथा जनस्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़े हैं। उन्होंने किसान-मजदूर एकता को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए संगठन को गांव-गांव तक मजबूत करने का आह्वान किया।
द्वितीय दिवस के दौरान वृद्धावस्था पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और आम नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। उपस्थित किसानों और मजदूरों ने सरकार से सवाल किया कि वर्षों से किए जा रहे पेंशन संबंधी वादों का क्या हुआ और देश के करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों, किसानों एवं श्रमिकों को सम्मानजनक जीवनयापन के लिए पर्याप्त पेंशन कब उपलब्ध कराई जाएगी। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि पेंशन व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो यह भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति का एक प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनकारी मुद्दा बनेगा और संगठन राष्ट्रीय नेतृत्व में व्यापक जनसंघर्ष का रास्ता अपनाएगा।
शिविर में बिजली की लगातार बढ़ती दरों को लेकर भी किसानों में भारी आक्रोश दिखाई दिया। वक्ताओं ने कहा कि महंगी बिजली, डीजल, खाद और बीजों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। किसानों ने कृषि कार्यों के लिए सस्ती एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने, विद्युत दरों की समीक्षा करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधारने की मांग की।
चिंतन शिविर में बेरोजगारी, युवाओं के पलायन, शिक्षा व्यवस्था की गिरती गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा, जल संकट, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक न्याय के प्रश्नों पर भी गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि गांवों से युवाओं का लगातार पलायन देश के ग्रामीण ढांचे के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिसके समाधान हेतु रोजगार आधारित विकास मॉडल अपनाना आवश्यक है।
विभिन्न सत्रों में न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने, कृषि लागत कम करने, किसानों के कर्ज संकट के समाधान, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, महिला सशक्तिकरण, सदस्यता अभियान तथा संगठन विस्तार जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसान और मजदूर केवल अपने आर्थिक हितों के लिए नहीं बल्कि जल, जंगल, जमीन, संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय महामंत्री टिंकू चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष (पश्चिम) देवेंद्र सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित आदित्य चेतन कृष्णागिरी, युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद आज़ाद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिलेश क्रांतिकारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमाकांत श्रीवास्तव, मंडल अध्यक्ष मेरठ अमरीश अहलावत, प्रदेश अध्यक्ष विश्वदीप टोनी, प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता सभा शिवराम यादव, प्रदेश महामंत्री अभिषेक यादव, तारकेश्वर सिंह, मोहम्मद कलीम, ममता रावत, राधा, आरती, मंडल अध्यक्ष प्रयागराज जालंधर सिंह पटेल, शिवराज सिंह यादव, राम प्रधान सिंह, मनोज कुमार रावत, सरकार अंसारी, सतीश कुमार यादव, शिवकुमार प्रताप सिंह, जेपी कनौजिया, राजकुमार सहित अनेक पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
द्वितीय दिवस के अंत में उपस्थित किसानों एवं मजदूरों ने संकल्प लिया कि किसान, मजदूर, युवा, महिला एवं वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन संघर्ष को और व्यापक बनाया जाएगा। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि सरकार किसानों, मजदूरों, युवाओं एवं गरीब वर्गों की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं होती है तो देशव्यापी जनआंदोलन को और अधिक तेज एवं व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
चिंतन शिविर के अंतिम दिन विभिन्न प्रस्तावों, मांगों एवं आगामी संघर्ष कार्यक्रमों पर अंतिम निर्णय लेते हुए राष्ट्रपति एवं केंद्र सरकार को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन पारित किया जाएगा।
जारीकर्ता
केंद्रीय कार्यालय
भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति

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