गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के छात्रों ने विकसित किया “क्वाड प्लेन हाइब्रिड कम्युनिकेशन आरसी प्लेन”


हरिद्वार, 29 मई।
देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों तक आपातकालीन खाद्य सामग्री एवं दवाइयाँ शीघ्र पहुँचाने के उद्देश्य से गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने “क्वाड प्लेन हाइब्रिड कम्युनिकेशन आरसी प्लेन (ड्रोन)” का सफल निर्माण किया है।
इस परियोजना को विद्यार्थियों सुब्रत मंडल, राहुल कठोर, अभिजीत हर्ष, तरुष, हर्ष राज, सूरज कुमार तथा मुहम्मद उमेर ने विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा एवं युवा वैज्ञानिक डॉ. अतुल वार्ष्णेय के निर्देशन में तैयार किया है।
छात्रों द्वारा विकसित इस क्वाड प्लेन की विशेषता यह है कि इसमें लगी मोटरें पूर्णतः ऑटोमैटिक हैं तथा यह प्रतिकूल मौसम एवं कठिन परिस्थितियों में स्वयं को संतुलित रखने में सक्षम है। यह तकनीक सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित राहत सामग्री पहुँचाने में उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल ने विद्यार्थियों की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के छात्र लगातार नवीनतम शोध एवं तकनीकी नवाचारों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस क्वाड प्लेन के निर्माण से छात्रों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के विद्यार्थियों के समक्ष अपनी तकनीकी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यह आविष्कार गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय को वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक बनेगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस क्वाड प्लेन को विकसित करने में विद्यार्थियों ने पिछले तीन वर्षों से निरंतर कठिन परिश्रम किया है। उन्होंने कहा कि आज संकाय परिसर में इसका सफल रिहर्सल भी किया गया, जिसमें ड्रोन की कार्यक्षमता और संतुलन क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
युवा वैज्ञानिक डॉ. अतुल वार्ष्णेय ने बताया कि यह क्वाड प्लेन आधुनिक तकनीक से निर्मित है, जिसका वजन लगभग 2.7 किलोग्राम है। इसमें लगी मोटरें 7 से 8 किलोग्राम तक का थ्रस्ट उत्पन्न करती हैं, जिससे यह लगभग 4 किलोग्राम तक का सामान आसानी से उठा सकता है। उन्होंने बताया कि सीमाओं पर घायल एवं तैनात सैनिकों तक दवाइयाँ और खाद्य सामग्री पहुँचाने के उद्देश्य से यह विशेष आविष्कार तैयार किया गया है।
संकाय के सहायक कुलसचिव डॉ. पंकज कौशिक ने युवा शोधकर्ताओं से बातचीत के आधार पर बताया कि यह क्वाड प्लेन सीधे ऊपर की ओर उड़ान भरने में सक्षम है तथा इसकी तकनीक ऐसी है कि यह दुश्मनों के रडार में आसानी से पकड़ में नहीं आता। उन्होंने कहा कि यह क्वाड प्लेन सैन्य प्रशासन एवं आपातकालीन सेवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
क्वाड प्लेन के सफल रिहर्सल को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की है।

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