​श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान ने 79 अज्ञात दिवंगतों को दी संगीतमय सुंदरकांड श्रद्धांजलि

​श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान ने 79 अज्ञात दिवंगतों को दी संगीतमय सुंदरकांड श्रद्धांजलि

​30वीं अस्थि कलश यात्रा लेकर आठ सदस्यीय दल हरिद्वार रवाना, गंगा जी में होगा विधि-विधान से विसर्जन

​कोटा, 20 जून।
मानवीय संवेदनाओं और सेवा की अनूठी मिसाल पेश करते हुए श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान द्वारा 30वीं अस्थि कलश यात्रा एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कर्मयोगी सेवा संस्थान की अगुवाई में शनिवार को नंदा देवी एक्सप्रेस से आठ सदस्यीय दल 79 अज्ञात दिवंगतों और मृत वानरों के अस्थि कलश लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुआ। इससे पूर्व, कोटा जंक्शन रोटेदा रोड स्थित गुरु धाम कॉलोनी में संस्थान के जिला मुख्यालय पर संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन कर सभी दिवंगत आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ के मुख्य संयोजक अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल बसंत भरावा नरेंद्र सिंह जादौन हेमंत सिंह सुनील शर्मा रोहित शर्मा संत कुमार चौहान ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर श्रद्धांजलि समर्पित की।

​संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ (रावण सरकार) ने बताया कि 13 दिसंबर 2025 से 20 जून 2026 तक कोटा के विभिन्न थाना अधिकारियों के माध्यम से संस्थान को 58 अज्ञात शव अंतिम संस्कार के लिए सौंपे गए थे। इनमें से तीन मृतकों की पहचान होने पर उनकी अस्थियाँ परिजनों को सौंप दी गईं। जबकि शेष 55 अज्ञात मृतकों का संस्थान ने विधिवत अंतिम संस्कार किया। इसके अतिरिक्त, 24 ऐसे निर्धन मृतक, जिनके परिजन हरिद्वार जाने में असमर्थ थे। उन्होंने भी अस्थियाँ संस्थान को सुपुर्द कीं। इस प्रकार कुल 79 मानव अस्थि कलशों के साथ-साथ इस अवधि में विद्युत करंट व सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए 9 मूक वानरों का भी संस्थान द्वारा अंतिम संस्कार कर उनके अस्थि कलश विसर्जन के लिए ले जाए जा रहे हैं।

​हरकी पौड़ी पर होगा मोक्ष के लिए विसर्जन
​इन सभी अस्थियों को 21 जून को हरिद्वार की पावन हरकी पौड़ी पर प्रमुख कर्मकांडी पंडित नरेश प्रधान द्वारा पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोचार के साथ विसर्जित किया जाएगा, ताकि इन भटके और अज्ञात जीवों की आत्माओं को मोक्ष प्राप्त हो सके। कोटा से हरिद्वार के लिए प्रस्थान करने वाले आठ सदस्यीय सेवा दल में संस्थान के कोटा जिला अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा, नीलम शर्मा, धर्मपाल सिंह, नीलम सिंह, मदन गोपाल मिश्रा, मुन्नी देवी, लक्ष्मण सिंह हाडा और अंजलि शर्मा शामिल हैं।

​विवाह की वर्षगांठ पर सेवा का अनूठा संकल्प
अस्थि विसर्जन का कार्य वर्ष 2008 से वर्ष में दो बार निरंतर जारी है ​संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी ने अपनी इस अनूठी सेवा के पीछे का इतिहास साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने 12 क्विंटल लकड़ी की चिता पर वरमाला डालकर और 12 संकल्पों के साथ विवाह किया था। शादी के तुरंत बाद भी उन्होंने हरिद्वार जाकर अज्ञात अस्थियों का विसर्जन किया था।। संस्थान द्वारा वर्ष में अस्थि विसर्जन के लिए दूसरी तारीख ( 12 दिसंबर) एवं प्रथम तारीख 21 जून निश्चित की गई हैं, जिस परंपरा का निर्वहन पूरी श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।

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